अल्हम्दुलिल्लाह हम इस मुबारक महीने में दाखिल हो चुके हैं जिसमें रोज़ व शब रहमत व बरकत और बख़्शिश का नुज़ूल होता है, यह ऐसा मुबारक महीना है जिसका इंतज़ार मोमिनों को 11 महीने तक रहता है।
 ऐसा महीना जिसमें नेकियों का अज्र व सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। 
 ऐसा महीना जिसमें सोना भी इबादत में शुमार होता है, सोना इबादत में शामिल है इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि हम ज़्यादा से ज़्यादा सोने को ही इबादत समझें 
बल्कि सोने को इबादत इस लिए कहा गया है कि हम बजाए इसके कि लघवियात में पड़ें कुछ देर सो कर नींद पूरी कर के इबादत के लिए चाक व चौबंद हो जाएं, खूब इबादत करें, खूब ज़िक्र व अज़्कार, तिलावत और नवाफिल का एहतिमाम करें, अपने गुनाहों की माफी तलब करें, रमज़ान की अज़्मत का ख्याल और एहतराम करते हुए अपने आप को गुनाहों से दूर रखें और बाल्खुसूस मोबाइल को बिला ज़रूरत इस्तेमाल न करें जितना हो सके मोबाइल से दूर रहें क्योंकि जहां इसका सही इस्तेमाल मुफीद और कार आमद है वहीं एक गलत टच गलत इस्तेमाल आपकी कमाई हुई नेकियों पर पानी फेरने के लिए काफी है।
यह महीना बड़ी अज़्मतों रहमतों और बरकतों वाला है इसको नए-नए पकवान बनाने खाने और सोने में, ईद की तैयारियों में, बाज़ारों में जा कर बर्बाद न किया जाए, रमज़ान कुरान का महीना है इस माह मुबारक में खूब कसरत से तिलावत करनी चाहिए, जैसा कि कुरान में अल्लाह रब्बुल इज्ज़त का इरशाद है: شهر رمضان الذي انزل فيه القرآن هدى للناس
`तर्जुमा: रमज़ान का महीना वह जिसमें कुरान नाज़िल किया गया जो लोगों के लिए हिदायत का ज़रिया है`
(सूरह बक़रह:आयत नंबर 185) 
 रमज़ान मेहमान है और बहुत खास मेहमान है यह ऐसा मेहमान है जो महीनों इंतज़ार के बाद आता है और यह मेहमान आपके गुनाहों को धोने, आपकी मगफिरत करने, आपको जन्नत की बशारत देने के लिए आता है_
रमज़ान की कद्र कर लें आज वक़्त है हम खुश किस्मत हैं जिन्हें अल्लाह ने सलामती के साथ रमज़ान तक पहुंचाया, क्या पता अगले रमज़ान तक हम में से कौन रहेगा कौन नहीं...
रमज़ान में फरिश्ते दुआओं पर आमीन कहते हैं इस लिए दुआओं का खूब एहतिमाम करना चाहिए अपने अगले पिछले गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए क्योंकि रमज़ान बख़्शिश का परवाना ले कर आता है_
अल्लाह हमारी खताओं को दर गुज़र फरमाए, हमें रमज़ान का इकराम करने वाला बनाए और खूब नेकियां समेटने वालों में शामिल फरमाए हमारी टूटी फूटी इबादतों को अपनी बारगाह में शरफ कुबूलियत बख्शे। आमीन

तालिब दुआ🤲
बिन्त शहाब✍🏻