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🖋🌹💠 सबक आमोज़ कहानियाँ 💠🌹🖋
👈 हराम तो हराम ही होता है __!!
कहते हैं कि एक बादशाह की शादी को अरसा हो गया मगर घर में वली अहद की कमी ही रही तो उसने सल्तनत के कोने कोने से अपने और अपनी मलिका के इलाज मुआजले के लिए हकीम बुलवाए। मुकद्दर में लिखा था और अल्लाह ने मलिका की गोद हरी कर दी ।
बेटा पैदा हुआ मगर एक पैदाइशी माज़ूरी के साथ यानी वो एक कान के साथ पैदा हुआ था। बादशाह ने अपने वज़ीरों से मशवरा किया कि इतनी बड़ी सल्तनत की बागडोर संभालने के लिए पैदा होने वाला ये वली अहद जब अपने आप को यूँ माज़ूर पाएगा तो एहसास महरूमी का शिकार हो जाएगा। किस तरह उसकी इस खामी पर काबू पाया जाए?
वज़ीरों ने मशवरा दिया बादशाह सलामत, ये तो कोई बात ही नहीं, एलान करा दीजिये कि आज से जो भी बच्चा पैदा हो उसका एक कान काट लिया जाए। शहजादे के सारे हमजोली और उसके सामने पलने वाली सारी नस्ल जब एक कान वाली होगी तो शहजादे के दिल में किसी किस्म की महरूमी का एहसास ही नहीं पैदा होगा। हुक्म नाफ़िज़ कर के अमल्दरामद शुरू करा दिया गया, अगले दसिओं सालों में मुमलकत में एक कान वाली नस्ल देखने को मिली और लोग इस आदत और तकलीद में रच बस गए।
एक बार कहीं से घूमता फिरता भोला भटका एक नौजवान इस मुमलकत में आन टपका। लोग दो कानों वाले लड़के को देख कर बहुत हैरान हुए, बच्चे इस अजीब उल खलकत नौजवान के पीछे पड़ गए और दो कानों दो कानों वाला कह कर छेड़ते। इस नौजवान को भी अपना आप एक अजूबा लगना शुरू हो गया, ताकि वो इन लोगों में तमाशा बन कर ना रहे उस ने अपना एक कान ही कटवा लिया।
फ़िक़्ह में एक बुनियादी उसूल ये होता है कि: सब लोगों का किसी एक बात पर मुत्तफ़िक हो जाना उसे हलाल नहीं बना दिया करता।
सैयदना इब्राहिम अलैहिस्सलाम की पूरी कौम शिर्क की माज़ूरी का शिकार थी, एक अकेला इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) उन में और उन को बहुत ही अजीब दिखाई देता था।
सैयदना लूत अलैहिस्सलाम की पूरी की पूरी कौम फितरत की मुखालिफ सम्त में चलने वाली थी, एक अकेला लूत (अलैहिस्सलाम) उन में अजीब दिखाई देता था क्योंकि वो उन जैसा काम नहीं करता था।
सैयदना शोएब अलैहिस्सलाम की पूरी की पूरी कौम सूद और चोर बाज़ारी में ऐसी मुब्तला थी कि उन में अकेला शोएब (अलैहिस्सलाम) बहुत ही अनोखा नज़र आता था।
इस लिए हराम पे जमा हो जाना उस को हलाल नहीं कर सकता ...दुरुस्त राह पे गामज़न रहें ये ही कामयाबी है