📖 مضمون

क़ुरान और हदीस की रोशनी में खजूर के फायदे

खजूर अल्लाह ताला की अता करदा एक बाबरकत नेमत है जिसका ज़िक्र कुरान-ए-मजीद में भी आया है और हदीस-ए-नबविया ﷺ में भी इसकी खास फजीलत बयान की गई है। अहले इल्म फरमाते हैं कि जिन चीज़ों का ज़िक्र वही में आए, वह महज गिज़ा नहीं होतीं बल्कि इंसान के लिए खैर और फायदे का जरिया होती हैं।
कुरान-ए-करीम में हज़रत मरियम अलैहिस्सलाम के वाकये में खजूर का ज़िक्र मिलता है, जहां अल्लाह ताला ने फरमाया कि खजूर के दरख्त को हिलाया जाए तो ताज़ा खजूरें गिरेंगी। अहले तफसीर के मुताबिक यह इस बात की दलील है कि खजूर कमजोरी के वक्त कुव्वत और तस्कीन का जरिया बनती है।
हदीस-ए-मुबारका में रसूल-ए-अकरम ﷺ की खजूर से मोहब्बत और इसके इस्तेमाल का ज़िक्र बार बार आता है। नबी ﷺ इफ्तार खजूर से फरमाया करते थे, जो इसकी फजीलत और अफादियत की वाज़ेह दलील है।

खजूर खाने के अहम फायदे

1. सुन्नत-ए-नबवी ﷺ पर अमल
खजूर खाना रसूल-ए-अकरम ﷺ की सुन्नत है, और सुन्नत पर अमल खुद बाइसे अज्र व बरकत है।

2. बरकत वाली गिज़ा
अहादीस में खजूर को बाबरकत करार दिया गया है, यानी इसमें फायदा आम गिज़ाओं से ज्यादा है।

3. फौरी तवानाई का जरिया
अहले इल्म और माहिरिन दोनों इस बात पर मुत्तफिक हैं कि खजूर जिस्म को फौरन कुव्वत देती है, खास तौर पर कमजोरी के वक्त।

4. फितरी और सादा गिज़ा
खजूर में बनावट या मिलावट नहीं होती, यह कुदरती तौर पर मुकम्मल गिज़ा है, इसी लिए इस्लाम सादगी की तरगीब देता है।

5. भूख और कमजोरी में मुफीद
हदीस के मफहूम के मुताबिक जिस घर में खजूर मौजूद हो, वहां भूख का एहसास कम हो जाता है, जो इसकी गिज़ाइयत की दलील है।

6. रूहानी फायदा
चूंकि खजूर सुन्नत के मुताबिक खाई जाती है, इसलिए इसका असर सिर्फ जिस्म तक महदूद नहीं बल्कि दिल और रूह पर भी पड़ता है।

7. शुक्र गुज़ारी का जरिया
खजूर जैसी नेमत इस्तेमाल करना इंसान को अल्लाह की नेमतों की कद्र सिखाता है।
 

खजूर महज एक फल नहीं बल्कि सुन्नत, बरकत और फायदे का मजमुआ है। कुरान व हदीस की रोशनी में यह बात वाज़ेह होती है कि खजूर का इस्तेमाल इंसान के लिए जिस्मानी, रूहानी और अखलाकी तीनों पहलुओं से मुफीद है। अगर हम अपनी जिंदगी में सुन्नत-ए-नबवी ﷺ को इख्तियार करें, तो हमारी गिज़ा भी इबादत बन सकती है।
अल्लाह ताला हमें अपनी नेमतों की कद्र करने और सुन्नत पर अमल की तौफीक अता फरमाए। आमीन।