क्या आपने कभी शैतान को धोखा दिया है?
✍️रिशहात कलम: मुफ्ती मोहम्मद तस्लीम उद्दीन अल-महमूदी
यह कोई मुश्किल काम नहीं। बस जरा सी होशियारी,
जरा सी तेजी, और नीयत में खलोस चाहिए।
यह दरअसल एक बहुत मजे की गेम है। 
जिसमें हार शैतान की होती है, और जीत अल्लाह के रजा की।
यह गेम कैसे सीखेंगे? 
"नेकी को हर वक्त लंबी चौड़ी सोच में मत उलझाया करें, बस फौरन कर लिया करें, ताकि शैतान को वसवसा डालने का मौका ही न मिले।" 
चलें आएं देखते हैं कैसे?
कभी कजाए हाजत से फरागत पर हाथ धोते हुए अचानक वजू शुरू कर दिया करें।
शैतान को मौका ही न दें कि कहे
"बाद में कर लेना" अभी क्यों करना है? "इस वजू ने रहना नहीं है" बस आप कर लें। बिना कुछ सोचे। आपके गुनाह बहते जाएंगे।
और शैतान सर पकड़े बैठा होगा।
घर वालों को अचानक मुस्कुरा कर देख लीजिए।
किसी एक को बिला वजह दुआ दे दीजिए।
यह भी सदका है।
कभी घर में इधर उधर आते जाते हुए अचानक जाए नमाज पर खड़े हो जाइए,
दो नफल की नीयत बांध लीजिए, बगैर किसी लंबी तमहीद के, बस अल्लाह की रजा के लिए।
कभी मोबाइल इस्तेमाल करते हुए अचानक कुरान व हदीस एप्लीकेशन खोल कर चंद आयतें पढ़ लें।
आप तस्बीह को देख कर यह सोचते हुए गुजर रहे हैं कि आराम से फारिग होकर पढूंगा/गी।
बस आप अचानक से उठाएं और पढ़ना शुरू कर दें,
चाहे 30,40 बार ही कुछ पढ़ें।
सदके का ख्याल आए तो "बाद में" का दरवाजा बंद करके जो अभी है।
उसी में से फौरन निकाल दीजिए।
दिल में किसी के लिए कभी हसद सा उभर आए तो अचानक उसके लिए बेहतरीन सी दुआ कर दीजिए,
यह दिल को साफ कर देता है
और हुकूक़ुल इबाद की खामोश इबादत है।
अजान की आवाज पर नमाज को टालने की बजाए अचानक उठ जाइए और कहिए लब्बैक या रब्बी।
"मैं इसी लम्हे हाजिर हूं मेरे अल्लाह...!" 
कभी बैठे बैठे अचानक मुस्कुरा कर "अलहमदुलिल्लाह" कह दीजिए।
शुक्र। शैतान की सबसे बड़ी शिकस्त है।
खामोशी से काम काज में मशरूफ हैं तो अचानक कलमा तैयबा पढ़ लें। कभी सूरह इखलास पढ़ लीजिए। यह ईमान की ताजगी भी है,
और तौहीद का ऐलान भी। और शैतान को सबसे ज्यादा नापसंदीदा भी। खाना खाने लगे हैं।
अचानक एक प्लेट किसी और के लिए निकाल लीजिए।
किसी ने दिल दुखा दिया था। और वो बातें याद आ रही हों तो
अचानक खुद से कह दीजिए कि
अल्लाह आपकी रजा के लिए उसे माफ किया।
यह नफ्स पर सबसे भारी और अल्लाह के हां सबसे वजनी अमल है।
पढ़ाई या काम काज की मसरूफियत में हलकान होते हुए अचानक कुछ वक्त के लिए मां बाप के पास आ कर बैठ जाइए, कभी मुस्कुराते हुए उनके हाथ थाम लीजिए।
किसी अहम मौके का इंतजार किए बगैर कभी अचानक उन्हें गर्मजोशी से गले मिल लीजिए, खामोशी से दुआ ले लीजिए। यह जन्नत के खूबसूरत दरवाजे हैं।
और सबसे खूबसूरत लम्हा वो होता है, जब किसी खास मौके की तलाश की बजाए काम काज में मशरूफ हों तो। आप अचानक अल्लाह से कह दें: "अल्लाह जी मैं आपसे मोहब्बत करता/करती हूं।" 
मुझे नफ्स व शैतान के शर से बचा लीजिए।
शैतान सर पीटता रहा जाएगा। 
यकीन कीजिए। यह "अचानक" वाली नेकियां। 
शैतान को सबसे ज्यादा परेशान करती हैं।
क्योंकि उसे मोहलत ही नहीं मिलती कि इस नेकी को delay करवाने का वसवसा डाले।
तो आज ही से यह "अचानक वाले काम" शुरू कर दीजिए।
हर अचानक वाली नेकी अल्लाह के करीब और शैतान से दूर लेती जाएगी। इंशाअल्लाह