क्या जिहाद के लिए "इमाम" का होना शर्त है।
क्या जिहाद के सही होने के लिए इमाम या खलीफा का होना शर्त है?
क्या जिहाद सिर्फ राज्य या सरकार का काम है?
क्या राज्य और सरकार की इजाजत के बगैर जिहाद नाजायज है?
कुछ लोग इस बारे में मुगालते का शिकार हैं। वो जिहाद के की सेहत के लिए इमाम की मौजूदगी या राज्य की इजाजत को शर्त करार देते हैं। ऐसे लोगों को दर हकीकत हजरात फुकहा इकराम की उन इबारतों से मुगालता हुआ है। जिन में जिहाद के लिए इमाम और अमीर की जरूरत और अहमियत को विभिन्न पैरायों में बयान किया गया है।
इस बात से कतअन इनकार नहीं कि हजरात फुकहा इकराम ने जिहाद की मुबाहिस में इमाम की मौजूदगी को विषय बहस बनाया है। लेकिन काबिल गौर बात ये है कि उन्होंने ये बात का हैसियत से छेड़ी?
जारी है ٫٫٫٫٫٫٫