हमारे युवाओं की आजकल कोई व्यक्तित्व ही नहीं है 

फ़िज़ूल की चीज़, बेकार कामों, इंटरनेट वग़ैरह पर अपना वक़्त बर्बाद करते हैं और ग़लत सोहबत में बैठ बैठ कर उनके अंदर की मौजूद क्षमताएँ दम तोड़ चुकी हैं। लड़के हों या लड़कियाँ उन्हें मालूम ही नहीं कि कामयाबी कैसे हासिल करनी है। उनका गोल क्या है, उनका मक़सद क्या है, करियर कैसे बनाना है, एक लीडर की खुसूसियत क्या होती हैं, वक़्त की पाबंदी क्यों ज़रूरी है, खुद एतमादी क्या चीज़ है वग़ैरह वग़ैरह 

यह हमारी नस्लें सेल्फ़ डाउट का शिकार हैं, इसमें खुद एतमादी नहीं है, अपने ऊपर भरोसा कर के कोई रिस्क नहीं लेना चाहता, क्योंकि उन्हें अपना आप इस क़ाबिल ही नहीं लगता, इस्लाम को ले कर हद से ज़्यादा कश्मकश का शिकार हैं, बिज़नेस के तरीक़े उन्हें नहीं आते,  नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत का उन्हें कोई इल्म नहीं है, गोरों की कामयाबी तो हम देखते हैं मगर उसके पीछे मौजूद राज़ पर कोई नज़र नहीं डालता 

आएँ और हम सब मिल के अपना मुहासबा करें ताकि हम जान सकें कि हमारी ज़ात में वो क्या कमज़ोरियाँ हैं जो हमें आगे बढ़ने नहीं दे रही है।

अपना मुहासबा करें और अपनी ज़ात में छुपी कमज़ोरियों को तलाश करें।

अनमोल ✍️