चाँद ने आसमाँ से ये एलान भेजा है फरिश्तों ने अर्श से पैगाम भेजा है
लूट लो जितनी लूट सकते हो नेकियाँ
अल्लाह ने हमारे लिए रमज़ान भेजा है
माह शाबान के आखरी अय्याम हैं,
बस कुछ ही लम्हों में वो अज़ीम महीना जिस को नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया शाबान शहरी,,
ख़त्म होने को है वो अज़ीम शब जिस का साल भर से इंतज़ार था ,शब बरात, लैलतुल मुबारकह भी गुज़र गई
निहायत खुश किस्मत होंगे वो अफराद जिन्होंने खुशदिली और इखलास व लिल्लाहियत के जज़्बे से सरशार हो कर इस रात का क़ियाम किया होगा और इरशाद नबवी,,सोमू नहा रहा,, पर अमल करते हुए दिन को अपने रब की रज़ा और खुशनूदी के लिए रोज़ा रख कर अपने गुनाहों को माफ़ करवाया होगा अब अनक़रीब वो बारक महीना जिस की निस्बत नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल्लाह रब्बुल इज्जत की जानिब की है,, माह रमज़ान,, जलवा अफ़गन होने को है ।
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हदीस के रावी हैं सरकार दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद नक़ल फरमाते हैं कि जब रमज़ान का महीना आता है तो आसमान के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं, और सरकश शैतानों को जंजीरों
में जकड़ दिया जाता है
रमज़ान का महीना बहारों का महीना है ,बरकतों का महीना है, नेकियों का वज़न बढ़ाने का महीना है ,
हज़रत सलमान फारसी रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें खिताब फरमाया कि ऐ लोगो रमज़ान का अज़ीम महीना साया अफ़गन है जो अज़्मत वाला भी है बरकत वाला भी है। इस में एक रात है जो हजार महीनों से बढ़ कर है। इस महीना इस में दिन का रोज़ा फ़र्ज़ और रात का क़ियाम नफ़्ल है
इस महीने में जो एक नफ़्ल इबादत करता है अल्लाह ताला इस को गैर रमज़ान के फ़र्ज़ के बराबर अजर देते हैं। और इस महीने का फ़र्ज़ गैर रमज़ान के 70 फ़र्ज़ के बराबर है ।यह महीना बर्दाश्त का महीना है गम ख्वारी का महीना है, इस महीने में मोमिन का रिज़्क़ बढ़ा दिया जाता है। जो किसी रोज़ा दार को इफ्तार कराता है अल्लाह ताला उस के गुनाहों को माफ़ फरमा देते हैं। जहन्नम से आज़ाद फरमाते हैं। और इफ्तार कराने वाले को रोज़ा दार के बराबर सवाब देते हैं। और रोज़े दार के सवाब में कोई कमी नहीं करते ।
लिहाज़ा हमें चाहिए कि हम इस महीने का एहतराम करें। इस की कद्र करें। और इस के आने से पहले इस की तैयारी करें। और जब आ जाए तो इस का खूब एहतिमाम करें ।
गुनाहों से बचें, नेकियों में सबक़त करें तिलावत का एहतिमाम करें, अल्लाह की खुशनूदी के लिए रोज़ा रखें, और तरावीह पढ़ें,
जिन को अल्लाह ने माल दिया है ज़कात अदा करें। अल्लाह रब्बुल इज्जत हमें रमज़ान की अज़्मतों ,बरकतों रहमतों, से माला माल फरमाए
बे ज़बान को जब वो ज़बान देता है
पढ़ने को फिर कुरान देता है
बख्शने पे आए जब उम्मत के गुनाहों को
तोहफे में गुनहगारों को रमज़ान देता है
अज़कलम✍️ ,,मोहम्मद तनवीर,,