आज एक गाजा की वीडियो देखी, आँखों से आँसू बह पड़े
मेरे गाजा के बच्चे दुश्मन شناसी में माहिर थे
 मगर मुसलमानों ने तो
KFC
का बहिष्कार भी न किया था 
ज़रा पढ़ें बच्चे के अल्फाज़ को दिल थाम कर पढ़ें 
जो शख्स खुद को नहीं बदलता, वो राख की मानिंद बिखर जाता है, और फ़ना हो जाता है,
ए उम्मत इस्लामी! तेरा वक़्त आ चुका है,
हम पहले अपने दुश्मन पर ग़ालिब थे, तेरी तारीख एक ऐसा सूरज है जो न डूबा है, और न ही इस सरज़मीन को छोड़ा है,
ए उम्मत मुस्लिमा ये हमारे घर के खंडहर हैं, जिन्हें दुश्मन ने तबाह किया है
ए अदू इस्लाम हमने तुम्हारे लिए हर किस्म की मौत तैयार कर रखी है,
!इन अल्फाज़ में कोई खौफ नहीं 
!कोई गुलामी की झलक नहीं 
!मैं आज तक अपने आप को आज़ाद समझता रहा 
लेकिन आज पता चला कि मैं कैद हूँ, गाजा आज़ाद है,
मैं मुर्दा हूँ, गाजा आज भी अपनी शान ओ शौकत के साथ जिंदा है,
क्योंकि गाजा के हौसले आज भी बुलंद हैं 
अलहमदुल्लाह,
ए गाजा के जवानों आप उम्मत मुस्लिमा पर फातिहा पढ़िए 
आज सिर्फ अहले गाजा जिंदा हैं,
सिर्फ अहले गाजा٫