✍🏻गुल रज़ा राही अररियावी

 क़ुरान को हम सीनों में ऐसे बसाएँगे
चेहरों पे तिलावत का एक नूर सजाएँगे

       क़ुरान करीम ऐसी किताब है जिसने इंसानों को हमेशा इज्ज़त बख़्शी, क़द्र ओ मनज़िलत अता की इससे वाबस्तगी रखने वाले दराइन की सआदत से सरफ़राज़ हुए-

 यह किताब रोज़ ए अज़ल से ही अपनी ख़ास उसलूब की वजह से लोगों की मंज़ूर ए नज़र रही है,
बे शुमार लोगों ने इस हिदायत पाई है, इस किताब ने लोगों से हक़ीक़ी खुदा तआर्रुफ़ कराया
इससे जुड़ने वाले लोग हिदायत की दौलत से माला माल हुए-

    इसी की निस्बत गुज़िश्ता रमज़ान में मेरा ताल्लुक़ एक घराने से भी हुआ
जहां रह कर राक़िम ने पूरे महीने तरावीह सुनाया-

 इस ताल्लुक़ के तक़रीबन एक साल मुकम्मल होने को है,
राक़िम इस दौरानिया में इस घराने को भुला नहीं सका, उन्होंने जो मेरी खिदमत की और जो मुहब्बतों से नवाज़ा उसको ज़ेहन से निकाल नहीं पाया, यक़ीनन यह उनकी ऐसी मुहब्बत ओ इनायत है जिस का मुअतरिफ़ बंदा हमेशा रहेगा, इसी ख़ालिस मुहब्बत का नतीजा है कि आप की क़द्र ओ मनज़िलत मेरे दिल में अब तक वैसे क़ायम ओ दायम है जैसा कि शुरू दिन में था, कुछ दिन पहले जब मेरी उनसे बात हुई थी तो उन्होंने ने यह ख़ुश ख़बरी सुनाई थी हाफ़िज़ जी मेरे फ़र्ज़ंद ए अर्जुमंद अज़ीज़म अब्दुल रहमान सलमा की दस्तारबंदी हो रही है जिस में मुझे शिरकत का हुक्म भी दिया था पर मैं अपनी मजबूरी और ख़ास मक़सद में मसरूफ़ होने की वजह से शिरकत से माज़रत कर दी
 लेकिन; मुझे इस पर सआदत महफ़िल में शरीक हो कर अज़ीज़म अब्दुल रहमान को मुबारकबादी न देने का सद अफ़सोस है लेकिन इस मौक़े पर ग़ायबाना ही सही पर ज़ेहन ओ फ़िक्र के एतबार से मैं उनके साथ हूं -

     वह घड़ी यक़ीनन वालिदैन के लिए पुर मसर्रत होती है जब उनके लख़्त ए जिगर कामयाब हो जाए और वालिदैन इसको अपनी आंखों से देख रहे हों -

  वह ख़्वाब जो उन्होंने अपनी औलाद के सिलसिले में देखा था और जिस के लिए उन्होंने हर तरह की क़ुर्बानियां दी थी आज वह शर्मिंद ए ताबीर हो रहा है और वह अपनी आंखों से इस कामयाबी को देख रहे हैं,
और उनका पिसर नेक अख्तर अज़ीज़म हाफ़िज़ अब्दुल रहमान यह ख़ुशी अपने वालिदैन वा अक़ारिब को दे रहा है -
     हाफ़िज़ अब्दुल रहमान एक ख़ुश अख़लाक़, नर्म मिज़ाज, आजिज़ी पसंद और अदब ओ एहतराम का जज़्बा रखने वाला बेहतरीन तालिब ए इल्म है मुझे तक़रीबन डेढ़ महीना उनके साथ उठने बैठने और रहने सहने का मौक़ा मिला, राक़िम ने उसे क़रीब से देखा तो उसके हुस्न ए अख़लाक़ का मुअतरिफ़ हो गया, आज के इस दौर में जब कि बच्चे सख़्त मिज़ाज होते हैं ऐसी सूरत ए हाल में ऐसे औलाद का होना अल्लाह ताला की ख़ास नेमत है, वह एक मेहनती तालिब है यही वजह है वह शब ओ रोज़ की मुसलसल जद्द ओ जहद से क़ुरान याद कर के आज वह अपने सर पर दस्तार सजा रहा है,
इस में वालिदैन के साथ साथ वह तमाम लोग मुबारकबादी के मुस्तहिक़ है जो उनकी कामयाबी के लिए दुआ गो रहे -

     यह दस्तार जो उनके सर पर सजी है इस के लिए मैं बतौरे ख़ास उनके वालिद हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा साहिब मा अन के अहल ए ख़ाना और तमाम असातज़ा को मुबारकबाद पेश करता हूं जिन की मेहनतों का यह समरा है जो आज हमें देखने को मिल रहा है-

    मैं दुआ गो हूं कि अल्लाह ताला आप के तमाम औला को को कामयाबी से नवाज़े, सेहत ओ आफ़ियत के साथ आप सब को सलामत रखे और मज़ीद तरक़्क़ियात से नवाज़े आमीन