नहमदुहु व नुसल्ली अला रसूलिहिल करीम
अऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
वल्लज़ीना जाहदू फीना लनहतेदियन्नहुम सुबुलना

हिंदुस्तान की आज़ादी यह हमारे लिए ज़िंदगी का अज़ीम दरस है आज हम आज़ादी के नाम जश्न व महफ़िल का तसव्वुर ज़ेहन में लाते हैं जब कि जंग आज़ादी का हासिल सबक यह है कि हमें इंक़लाब बरपा करने के लिए जहद को अपनाओ
ज़ुहद को अपनाओ
वक़्त लगाओ
खुद को मिटाओ
मशवरों से काम नहीं बनते फुनून से काम बनते हैं
इरादों से काम नहीं बनते अमल से काम बनते हैं
कसम उठाने से काम नहीं बनते कदम उठाने से काम होते हैं
अकाबिर का एक एक नक्श यह कहता है कि हथियार से ज़्यादा हाथ में जान होती है ज़मीन पर इतना चलो कि ज़मीन आपके कदम के निशान देख देख कर थक जाए आपके कदम न थके हमारा मुल्क गुलामी से कैसे निकला?
आप का यह मुल्क झगड़ा फसाद से कैसे आज़ाद हुआ?
आप का यह मुल्क ज़ुल्म के जाल से इंसाफ की छांव में कैसे पनाह लिया?
सिर्फ नारे बाज़ी से अमन कायम हो गया?! कि मजमूए के बीच में खड़े हो कर गले में तिरंगे की पट्टी डाल कर सीना चौड़ा कर के बुलंद आवाज़ में आवाज़ लगा दी कि हम एक हैं इस नारे से ज़ालिम का तख्ता पलट गया? यह उस नारे की बरकत के हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में है भाई भाई के इस नारे की बुनियाद पर कुछ तो इंसाफ۔۔۔۔۔हुआ आज हमें यह नारा महज۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔नज़र आती है लेकिन यह नारा खून की नदियां बहने के बाद
लाशों की लारियां कब्रिस्तानो में मुंतकिल होने के बाद
जवानियां खपाने के इस काफिये में पिरोया गया कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई!
प्यारी बहनों!
आइए हम कुछ तारीख पर नज़र डालते हैं! एक अज़ीम आलिम दीन मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी रहमतुल्लाह अलैह पर नज़र जा कर रुकती है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में दीनी जद्दोजहद के साथ सियासी बसीरत इंक़लाबी हमियत इस मुल्क हिंदुस्तान के लिए बेश बहा खिदमात का सरमाया सिर्फ किया है आप सिर्फ आलिम ही नहीं थे बल्कि आला मयार के सियासत दान भी थे उन्होंने मज़हबी आज़ादी के साथ सियासी आज़ादी पर बड़ी मेहनत की मुसलमानों में सियासी बेदारी पैदा किया
इंक़लाबी तहरीक शिरकत की ब्रितानवी हुकूमत के खिलाफ महाज़ खड़ा किया
उनकी चाल बाजियों मक्कारियों को उछाल के सब हिंदुस्तानियों को वाकिफ करवाया
आप गांधी जी जैसे अज़ीम रहनुमाओं को साथ ले कर इंक़लाबी सरगर्मियों को फरोग दिया है
ब्रितानवी हुकूमत की साजिशों के۔۔۔۔۔۔۔۔۔हज़रत का था खिलाफत उस्मानिया पर होने वाले हमले के बारे में बड़ी पेचीदा मालूमात हज़रत ने ही निकाल कर बाहर डाला था
आपने खिलाफत उस्मानिया की बका के सिलसिले में तुर्क कयात के साथ मजबूत ताल्लुकात बनाए थे
ब्रितानवी हुकूमत के खिलाफ मुज़ाहमत पे जेलों की सौबते तक आपने बर्दाश्त की बल्कि वतन की आज़ादी और तरक्की के लिए हज़रत हर तरह की कुर्बानी देने के लिए हर दम तैयार रहते थे
और ऐसे ही किफायत उल्लाह साहब रहमतुल्लाह अलैह ने भी ब्रितानवी हुकूमत को नाकाबिल कुबूल करार दिया है आप ने हिंदुस्तान के मुसलमानों को अंग्रेज़ों के खिलाफ मुत्तहिद करने में अहम किरदार अदा किया है मुफ्ती रहमतुल्लाह अलैह ने हर मौके पर आज़ादी के हक में आवाज़ बुलंद की उन्हें भी कई मरतबा जेल की हवाएं खानी पड़ी महज मुल्क की तरक्की कौम की इस्लाह के सिलसिले में आप की कयादत में मुसलमानों और दीगर बर सगीर के कौमों को आज़ादी की राह पर गामज़न किया है
हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह हिंदुस्तान के अज़ीम शख्सियत है आप दारुल उलूम देवबंद के मुताल्लिम हैं आप ने इल्मी व रूहानी मिशन पर काम का आगाज किया आप का लकब हकीम उल उम्मत है आप लोगों की अखलाकी व रूहानी तरबियत के साथ इज्तिमाई मसाइल का भी हल फरमाते थे थानवी रहमतुल्लाह अलैह ने अंग्रेज़ों की गुलामी को मुसलमानों के दीनी अखलाकी ज़वाल का सबब बताया है आप ने अपनी तहरीरों बयानात और शागिर्दों के जरिए आवाम को अंग्रेज़ों की गुलामी से निजात दिलाने की हर मुमकिन कोशिश और फिक्र की है आप हर अमली मैदान में अंग्रेज़ों के खिलाफ इंक़लाबात बरपा किए हैं आप ने मुसलमानों की सियासी जद्दोजहद में भी बड़ा अहम रोल अदा किया है थानवी रहमतुल्लाह अलैह का पैगाम यह था कि दीन और दुनिया दोनों के मसाइल का हल इस्लामी तालीमात में मौजूद है थानवी रहमतुल्लाह अलैह का ज़ोर इस बात पर ज़्यादा था कि दीन के साथ साथ सियासी हुकूक की हिफाज़त करें!

प्यारी बहनों!
मैं किन की कुर्बानियों को समेटों, किन का तज़किरा करूं, किन को तर्क करूं समझ के बाहर है एक एक मुजाहिद की ज़िंदगी पर नज़र डालती चलूं तो यह सूरज की रोशनी गुरूब तक का सफर आसानी से तय कर सकती है लेकिन दास्तान मुजाहिद मुकम्मल बयान नहीं की जा सकती है!
यह एक मुस्तकिल बाब है जो तवील वक़्त का तालिब है अलबत्ता चंद मुहद्दिसीन के नामों से एक मुताला का शोशा छोड़ कर अपनी बात खत्म करती हूं!
मुजाहिदीन आज़ादी में हज़रत इमदाद मुहाजिर मक्की रहमतुल्लाह अलैह का नाम आता है हज़रत सैयद ज़ामिन शहीद रहमतुल्लाह अलैह का नाम हज़रत हुसैन अहमद मदनी रहमतुल्लाह अलैह का नाम आता है हज़रत अताउल्लाह शाह बुखारी रहमतुल्लाह अलैह का नाम है इन की जिंदगियों को पढ़ कर इन के जैसे हौसले बनाने की फिक्र करें इन के अलावा और भी मुजाहिदीन हैं
अल्लाह पाक हमें अक्ल सलीम नसीब फरमाए आमीन

व आखिर दवाना अन अल हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन