स्रोत: उलमा और मुसलिहीन-ए-उम्मत और उनके फितने
कलम से: मुहद्दिस-उल-अस्र हज़रत मौलाना सैय्यद मुहम्मद युसूफ बिनौरी रहमतुल्लाह*
सू-ए-ज़न का फितना
हर शख्स या हर जमात का ख्याल यह है कि हमारी जमात का हर फर्द मुखलिस है, उनकी नीयत बखैर है, और बाकी तमाम जमातें, जो हमारी जमात से इत्तेफाक नहीं रखतीं, वो सब खुदगर्ज़ हैं; उनकी नीयत सही नहीं, बल्कि अगराज़ पर मबनी है। इसका मंशा भी उज्ब व किब्र है।
नाकिल: मुहम्मद अज़हर