क्या मुसलमान के लिए क्रिसमस डे मनाना जायज़ है? क़ुरान व सुन्नत की रोशनी में मुसलमान का طرز عمل क्या होना चाहिए?
उलेमा के नज़दीक मुसलमान के लिए क्रिसमस (जो हज़रत ईसाؑ को अल्लाह का बेटा मानने के अक़ीदे से منسلک त्योहार है) मनाना जायज़ नहीं है, क्योंकि यह एक गैर इस्लामी मज़हबी त्योहार है और इसमें शिरकत या इसकी खुशी मनाना गैर इस्लामी अक़ाइद की ताईद शुमार होती है।
क़ुरान मजीद में हज़रत ईसाؑ के बारे में वाज़ेह तौर पर फरमाया गया:
“ईसा इब्न मरियम सिर्फ़ अल्लाह के रसूल हैं”
(सूरۃ النساء: 171)
और फरमाया:
“खुदा के शायान नहीं है कि वह कोई औलाद बनाए”
(सूरۃ मरियम: 35)
अल्लाह ताला ने फरमाया :
न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद
( सूरह इखलास 3)
क्रिसमस का बुनियादी अक़ीदा (नउज़ु बिल्लाह) अल्लाह के बेटे का तसव्वुर है, जो क़ुरान के सरीह खिलाफ़ है।
नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
“जो जिस क़ौम की मुशाबहत इख़्तियार करे, वह उन्हीं में से है”
(अबू दाऊद)
इस हदीस से मालूम होता है कि मुसलमानों को गैर मुस्लिमों के मज़हबी शआएर में मुशाबहत से बचना चाहिए।
मुसलमान का طرزِ عمل यह होना चाहिए कि
गैर मुस्लिमों के मज़हबी त्योहार न मनाएं ।
एहतराम और हुस्नِ सुलूक बरकरार रखें
इस्लाम हमें बदतमीज़ी या नफरत की इजाज़त नहीं देता।
मुबारकबाद देने से इज्तिनाब करें
क्योंकि यह उनके मज़हबी अक़ीदे की ताईद बन सकती है।
आम समाजी ताल्लुकात जायज़ हैं
जैसे पड़ोसियों से अच्छा बर्ताव, अख़लाक़ के साथ पेश आना।
लेकिन क्रिसमस मनाना या इसकी मुबारकबाद देना जायज़ नहीं।g