पढ़ाई का महत्व
बकलम ✍️ : मोहम्मद अली सुब्हानी
पढ़ाई इंसान के ज़हन को खोलता है और उसके ज्ञान में इज़ाफ़ा करता है। पढ़ाई के ज़रिए इंसान नई बातें सीखता है, विभिन्न ख़यालात से वाक़िफ़ होता है और दुनिया को बेहतर अंदाज़ में समझने लगता है। आवामी तक़रीर (Public Speaking) में सबसे ज़्यादा ज़रूरी चीज़ ज्ञान है, और ज्ञान में इज़ाफ़ा पढ़ाई से ही मुमकिन है। पढ़ाई हमें लिखने वालों के विभिन्न अंदाज़-ए-फ़िक्र, उनकी सोचने की सलाहियत और उनकी ज़िन्दगी के पहलुओं से रू-ब-रू कराता है।
एक मशहूर कहावत है: "सौ बुरे दोस्तों से बेहतर एक अच्छी किताब है"। किताब तन्हाई में इंसान की बेहतरीन साथी होती है। ये न थकती है, न शिकायत करती है, बल्कि हर वक़्त हमें कुछ नया सिखाने के लिए तैयार रहती है।
अगरचे पढ़ाई की अहमियत से सब वाक़िफ़ हैं, मगर मसला ये है कि ज़्यादा तर लोग पढ़ाई करने के सही तरीक़े से नावाक़िफ़ हैं, या फिर वो इसमें मुस्तक़िल मिज़ाजी (Consistency) बरकरार नहीं रख पाते हैं।
पढ़ाई करने का बेहतरीन तरीक़ा ये है कि आपके हाथ में एक अलग नोटबुक हो जिसमें आप अहम नुक़ात लिखते जाएँ, या किताब में अहम हिस्सों को मार्कर से नुमायां करते जाएँ। इस तरह पढ़ी हुई चीज़ें ज़्यादा देर तक आपके दिमाग़ में महफ़ूज़ रहेंगी। पढ़ाई के दौरान सिर्फ़ आँखों से पढ़ना काफ़ी नहीं, बल्कि अल्फ़ाज़ को ज़बान से दोहराना भी ज़रूरी है ताकि तमाम बातें अच्छी तरह ज़ेहन नशीन हो जाएँ।
हमें चाहिए कि पढ़ाई को अपनी ज़िन्दगी का लाज़मी हिस्सा बना लें। सफ़र के दौरान या फ़ारिग़ वक़्त में मोबाइल पर रील्स देखने के बजाए कोई अच्छी किताब साथ रखें। ये ज़रूरी नहीं कि सिर्फ़ तदरीसी (तालिमी) शोबे से ताल्लुक़ रखने वाले ही पढ़ाई करें; बल्कि हर इंसान के लिए पढ़ाई ज़िन्दगी का एक लाज़मी जुज़ होना चाहिए।
पढ़ाई इंसान को न सिर्फ़ ज्ञान फ़राहम करता है बल्कि उसे सोचने, समझने और बेहतर फ़ैसले करने की सलाहियत भी देता है। जो लोग पढ़ाई को अपनी आदत बना लेते हैं, वो हमेशा तरक़्क़ी की राह पर गामज़न रहते हैं।
हमें दुनिया से क्या मतलब, कुतुब ख़ाना वतन अपना।
मरेंगे हम किताबों में, वरक़ होगा कफ़न अपना।