आपको पता है सुकून क्या होता है?
आप कैसे अंदाज़ा लगा सकते हैं कि आप सुकून में हैं?
अपनी खुशी से, अपने कहक़हों से, चीज़ें हासिल कर लेने से, लोगों की मोहब्बत पा लेने से...?
यह एहसासात कीमती तो हो सकते हैं मगर यह सुकून की कीमत नहीं हो सकती। खुशी, कहक़हे, मोहब्बत यह एहसास चंद पैसों से खरीदा तो जा सकता है मगर सुकून जैसी बेश कीमत शۓ का एहसास पैसे पर मुनहसिर नहीं ।
जब आप की तवक्क़ुआत खोखली रह गई हों और तब आपकी समाअतों से आवाज़ टकराये "ला तरज इल्ला रब्बिक" जब आपके सब्र का पैमाना लबरेज़ हो गया हो और आपके अंदर कोई आपको झंझोड़ कर आवाज़ दे "इन अल्लाह मअस साबिरीन" जब अपने अंदर मचे शोर के साथ आप सजदे में गिर कर खुद को अल्लाह के हवाले कर दें और आप अपने गिर्द अपने रब की आगोश को महसूस करें ,जब आप के हाथ खाली रह गۓ हों लेकिन अल्लाह से उम्मीद का दामन आप ने ना छोड़ा हो, जब अल्फाज़ खत्म हो गۓ हों लेकिन पता हो अल्लाह खामोशियाँ भी सुन लिया करता है ।हाँ तब मिलता है सुकून , तब उतरता है बोझ दिल का, तब मिलता है रूह को सुकून, तब अल्लाह पर लाड आता है और तब ऐसा लगता है अल्लाह सिर्फ मेरा है।