💞दिल दो चीज़ों से रोशन होता है
इस्तग़फ़ार और ज़िक्र ए इलाही
और दो ही चीज़ों से जंग आलूद होता है
*ग़फ़लत और गुनाह*
इबादत...;; सजदों तस्बीहों का नाम नहीं है। सजदे, क़ियाम, रुकू और तस्बीह बंदगी की अलामत हैं।
मगर इबादत के कितने रंग और भी हैं।
वह जो अल्लाह तआला की मख़लूक़ के लिए आसानियाँ तलाश करता है।
वह जो अल्लाह के बंदों के लिए दिल में बुग्ज़ और हसद नहीं रखता।
वह जो छुप कर किसी पर एहसान करता है और भूल जाता है।
वह भी अब्द है उस की इबादत का भी अपना एक दर्जा है।
अल्लाह पाक हम सब को अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।💖
(आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन)