अज़ीज़ तहरीर निगार !
”यकीनन हम ने कलम के अमीन बनने का दम भरा है, और बज़रिये तहरीर निगारी सच बात को फैलाने का अज़्म किया है, दौरान-ए-मुताला आने वाली चंद बातें जिन्हें एक तहरीर निगार को मल्हूज़ खातिर रखना चाहिए पेश करते हैं
उम्मीद है ये चंद बातें एक तहरीर निगार के लिए फायदा बख्श होंगी
_आजिज़ी और इन्किसारी इंसानियत का जौहर हैं। मुमकिन है एक अच्छा इंसान अच्छा लिखारी न हो, मगर एक अच्छा लिखारी बहरहाल एक अच्छा इंसान ज़रूर होता है। आप अच्छे और मुतवाज़े इंसान बनने की कोशिश करें। इंशाअल्लाह अच्छे लिखारी बन जाएंगे
_ मुस्तकिल मिजाज़ी अच्छा दिन ज़रूर दिखाती है। जब भी कोई गहरे समंदर में गोता लगाता है तो उसे पहली मर्तबा न सही, अगली मर्तबा कीमती और नायाब मोती ज़रूर मिलते हैं। ताहम गोता वही लगाते हैं जो बा हिम्मत और बा हौसला होते हैं। यही लोग जिंदगी की तल्ख हकीकतों का हंसते खेलते सामना करते और तरक्की की मनाज़िल तय करते जाते हैं
(इक्तिबास: लिखना सीखिए अज़ मुफ्ती अबू लुबाबा शाह मंसूर सफ़्हा ६९) “