वक़्ती ताक़त का ग़लत इस्तेमाल एक ख़िताब दिल से


ख़ामा बकफ़ 🖊️मोहम्मद आदिल अररियावी

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मोहतरम क़ारीईन

मैं कई दिनों से इस फ़िक्र में मुब्तिला हूँ कि हमारे इलाक़े का एक साबिक़ एमपी जिसे अल्लाह ने वक़्ती ताक़त और इज़्ज़त दी थी अपनी इस जगेहत का ग़लत इस्तेमाल किया। वो धमकियाँ दे कर वोट हासिल करने की कोशिश कर रहा है। मैं वाज़ेह तौर पर कहता हूँ अगर अल्लाह ने आप को वक़्ती ताक़त दी है तो उसे ज़ुल्म धोंस या धमकियों में इस्तेमाल न करें वक़्ती इक़्तेदार का मतलब ये नहीं कि आप लोगों की ज़िंदगी मुश्किल बनाएँ जिस तरह आप ने लोगों को धमकाया धोका दिया और सताया ये क़ाबिल-ए-मज़म्मत है और याद रखें कि ज़िंदगी और मौत सब अल्लाह ही के हाथ में हैं तुम जैसे नाअहल बदकिरदार और धोके बाज़ लोग हज़ारों बन कर आए और चले गए। ख़ुदा न ख़्वास्ता अगर तुम ने अपनी ताक़त का ग़लत इस्तेमाल किया तो हिसाब नफ़्स-ए-हक़ीक़ी में होगा जहाँ कोई मकारी नहीं चलती।

कुछ लोग ख़ुदा की दी हुई वक़्ती ताक़त को अपनी अना हवस और इंतिक़ाम की आड़ बना कर इस्तेमाल करते हैं। ऐसी ताक़त का असल इम्तिहान ये है कि इंसान इस का इस्तेमाल इंसाफ़ ख़िदमत और आजिज़ी के लिए करे या दूसरों को डराने धमकाने और अपने मुफ़ादात के लिए इस्तेमाल करे जब ताक़त धोके साज़िशों और ख़ौफ़ की बुनियाद बन जाए तो वो इंसानियत के ख़िलाफ़ जुर्म बन जाती है धमकियाँ देना इल्ज़ाम तराशी करना रिश्ते दारों को हरासाँ करना या ताक़त के ज़ोर पर वोट लेना ये सब रविशें ग़ैर-अख़लाक़ी और ग़ैरक़ानूनी हैं। ऐसे तरीक़े न सिर्फ़ फ़र्द की इज़्ज़त को मजरूह करते हैं बल्कि पूरे मुआशरे को बेचैनी में मुब्तिला कर देते हैं हक़ का दिफ़ा करना सच बोला जाना और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना हमारा हक़ और फ़र्ज़ है ख़ामोशी बरतने से ज़ुल्म बढ़ता है इस लिए जहाँ हक़ हो वहाँ बात खुल कर होनी चाहिए मैं उन लोगों से भी मुख़ातिब हूँ जो रश्क ग़रज़ या जाती मुफ़ाद की भेंट चढ़ कर दूसरों को उकसाते हैं हसद और नफ़रत के बीज से कभी अच्छा नतीजा नहीं निकला अपने बच्चों ख़ानदान और अपने नाम की ख़ातिर सच और इंसाफ़ का साथ दें जो लोग आप के साथ ज़ुल्म करते हैं उन से जवाब देने की बजाए मज़बूत अख़लाक़ बावक़ार अंदाज़ और ख़ुदा की अदालत पर भरोसा करें

हम किसी भी तरह की फ़हशी शरारत या हरासाँ करने वाली हरकत क़बूल नहीं करते जिस ने भी तुम्हें वोट देने या किसी को दबाने की तलक़ीन की इस की ख़ामी भी सामने आ जाएगी तुम्हारे जो भी आमिराना रवैये हैं तुम्हें शर्म करनी चाहिए हमें धमकियों से डराया नहीं जा सकता हमारे वोट हमारी मर्ज़ी हैं और हम अमन-ओ-क़ानून के अंदर रह कर अपना हक़ इस्तेमाल करेंगे।

अल्लाह से दुआ है कि वो तुम्हें हिदायत दे आख़िर में हम तुम्हारी धमकियों से ख़ौफ़ज़दा नहीं हमें सर कटाने की धमकी देना आसान है मगर हमारा सर झुकने वाला नहीं जहाँ भी ज़ुल्म हुआ है हिसाब वहीं लिया जाएगा जिस का रब ही मालिक-ए-हक़ीक़त है।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त आप सब को सही रास्ता दिखाए। आमीन या रब्बुल आलमीन

वस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातुहु