किताब खाने से बेहतर

✍🏻 मुहम्मद आदिल अररियावी 
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पिछले कल मेरे एक बहुत करीबी साथी और दोस्त मौलाना इबादुर्रहमान भागलपुरी ने कहा कि बड़े दिनों से मेरी दिली तमन्ना थी कि मैं आपको कुछ खिलाऊँ लेकिन आप मेरे पास तशरीफ़ नहीं लाते थे इस दफ़ा जब मुलाक़ात हुई तो खिलाने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की तो मैंने कहा कि हमेशा तो हर चीज़ खाते पीते रहते हैं अगर हमें कुछ खिलाना चाहते हैं तो इससे बेहतर है कि मुझे खिलाने के बदले कोई किताब हदिया कर दें उन्होंने कहा कि यह तो बहुत अच्छी बात है क्योंकि कुछ खा लेंगे तो वो आज से कल तक हज़म हो जाएगा लेकिन किताब जब तक पढ़ते रहेंगे आपको सवाब मिलता रहेगा इसलिए उसी वक़्त उन्होंने मुझे यह किताब (क़लम नुमा) जो कि इब्नुल हसन अब्बासी साहब की लिखी हुई है हदिया की जब मैंने किताब ली और खोली तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई क्योंकि मुझे इस किताब की बड़े दिनों से तलाश थी जज़ाक अल्लाहु व अहसनुल जज़ा फ़िद्दारैन ।
मैं दिल की अमीक़ गहराईयों से दुआ करता हूँ कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त उन्हें हमेशा शाद व आबाद ख़ुश व ख़ुर्रम रखे सलामत रखे और इस किताब की बदौलत इसे ज़रिया-ए-आख़िरत बनाए दीन का दाई पक्का सच्चा रहबर बनाए आमीन या रब्बुल आलमीन।