ख़त्म-ए-नबुवत ईमान की बुनियाद और निजात का ज़रिया है



अक़ीदा-ए-ख़त्म-ए-नबुवत ईमान-ए-इस्लामी का बुनियादी सुतून है। इस अक़ीदे के मुताबिक़ हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ अल्लाह के आख़िरी नबी और रसूल हैं, आप के बाद कोई नबी नहीं आएगा। यही ईमान उम्मत-ए-मुस्लिमा के इत्तेहाद, दीन की तकमील और निजात का सबब है। जो मुसलमान इस अक़ीदे पर कामिल यक़ीन रखता है, वह हक़ीक़ी मोमिन है। ख़त्म-ए-नबुवत पर ईमान ही वह रौशनी है जो इंसान को राह-ए-हक़, फ़लाह और अबदी कामयाबी की मंज़िल तक पहुंचाती है।