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इमाम बुखारी की हयात-ए-मुबारका की चंद झलकियां। क़िस्त सानी
11 مئی، 2026
*ज्ञान प्राप्त करने का शौक:*
अपने शहर "बुखारा" में हदीस प्राप्त करने के बाद आपने यात्रा करने का दृढ़ संकल्प किया, और इसी उद्देश्य के लिए बड़ी लंबी यात्राएँ कीं, लगभग सभी इस्लामी देशों की धूल छान डाली, गाँव-गाँव और कस्बे-कस्बे का दौरा किया, पहाड़ों और रेगिस्तानों की सख्त चट्टानों और कांटेदार घाटियों की कभी परवाह नहीं की; बल्कि आपको सिर्फ यह मालूम हो जाता कि फलां शहर की फलां बस्ती में कोई मुहद्दिस है, और उनके पास वह हदीस है जो आपने नहीं सुनी, तो आप तुरंत कमर कसते, और हजारों मुसीबतों के बावजूद उस मुहद्दिस की खिदमत में हाजिर होकर हदीस का समाअ करते, गरज आपने कोई इस्लामी मुल्क ऐसा नहीं छोड़ा, जहाँ आप ब-गरज़े-हुसूल-ए-हदीस तशरीफ न ले गए हों, इस तरह आपने कमोबेश अठारह सौ श्यूखों से हदीस का समाअ किया। यकीनन यह इल्म-ए-हदीस से इंतहाई वालिहाना इश्क का नतीजा है, और हुसूल-ए-इल्म का बेपनाह शौक व जज्बा कि आपके अज्म-ए-सफर से चट्टानें भी चूर-चूर हो जाया करती थीं, आपकी जद्दोजहद, हुसूल-ए-हदीस में मेहनत व मशक्कत और रावियों के हालात खंगालने की फिक्र ऐसी थी कि उसकी मिसाल पेश करना मुमकिन नहीं, आपने अपनी जिंदगी के लैलो-नहार को हदीस के लिए वक्फ कर दिया था, हमह वक्त किताबत-ए-हदीस, हिफ्ज-ए-हदीस और तफ्तीश-ए-रिजाल ही आपका मशगला था।
*आपकी अब्करियत:*
आपको अल्लाह रब्बुल इज्जत ने आपकी मेहनत, तवज्जो, लगन और खुदा दाद कुव्वत-ए-हाफिजे की वजह से इल्म-ए-हदीस में इतना बुलंद मकाम अता फरमाया था, जहाँ तक रसाई हरकस व नाकस के बस में नहीं, आप एक अजीम मुहद्दिस बनकर दुनिया के सामने नमूदार हुए, चुनांचे अहादीस में अलल की मारिफत का मैदान हो, या सही व सकीम में इम्तियाज करने का मसला, हजारों रावियों के अहवाल पर इतलाअ का कठिन मरहला हो, या असमा-ए-रिजाल और उनकी कुन्नियतों के हिफ्ज का मामला, इमाम बुखारी की अब्करियत ने इन तमाम मैदान में जौलानियाँ दिखाईं।
एक तरफ अहादीस में यह इम्तियाजी शान हासिल था, तो दूसरी तरफ फिकह में भी महारत ताम्मह हासिल थी, चुनांचे नईम इब्न हम्माद इमाम बुखारी का तजकिरा करते हुए कहते हैं "मुहम्मद इब्न इस्माईल फकीह हाज़िहिल उम्मा" अबू मुसअब जुहरी फरमाते हैं: "अल बुखारी अफकह इंदना वल मालिक वल बुखारी किलाहुमा वाहिद फिल फिकह वल हदीस"। और अब्दुल्लाह इब्न अब्दुर्रहमान का कौल है कि "मुहम्मद इब्न इस्माईल आलमना व अफकहना" खुलासा यह कि आपकी इज्तिहादी सलाहियत, तफक्कुह और कुरान व हदीस से बराहे रास्त इस्तंबात पर कुदरत के तमाम उलमा कायल हैं।