एक लड़का हवा में 2 रुपये का सिक्का उछाल कर दांतों से पकड़ने का करतब दिखा रहा था।
आखिरी बार जब उसने यह हरकत की तो सिक्का गलती से उसके हलक में चला गया और उसका दम घुटने लगा।
पिता घबरा कर मदद के लिए पुकारने लगे। 
इतने में भूरे रंग के सूट में मलुबोस एक दरमियानी उम्र का आदमी दौड़ता हुआ आया। उसने फ़ौरन लड़के को संभाला, उसकी कमर पहले आहिस्ता और फिर ज़ोर ज़ोर से थपथपाई। चंद लम्हों बाद लड़के ने खांसा, उलटी की और सिक्का बाहर आ गया।
पिता की आँखों में खुशी के आंसू आ गए। उन्होंने बेटे को गले लगाया और फिर उस मोहसिन की तरफ देख कर एहतराम से पूछा:
"जनाब! क्या आप डॉक्टर हैं?"
अजनबी मुस्कुराया और बोला:
"नहीं भाई, मैं पाकिस्तान का वज़ीर-ए-ख़ज़ाना हूँ…
और यह मेरी तरबियत का हिस्सा है कि आवाम के हलक से पैसा कैसे निकाला जाता है!"