बहुत से लोग कहते हैं कि ईमानदारी का ज़माना नहीं, ला हौल वला कुव्वत इल्ला बिल्लाह, एक मोमिन और वो ऐसा कहे। मोमिन ऐसा नहीं कह सकता, मेरे दोस्तो !! ज़माने से हमें क्या लेना देना , हमारे उलेमा ने एक पते की बात लिखी है कि कमाल इसमें नहीं है कि आप ज़माना के साथ चलें , कमाल तो इसमें है कि हम ज़माना को अपने साथ चलाएं, ये बहुत मुख़्तसर बात है लेकिन अगर इसको खोला जाए तो ये : दरिया बकूज़ा : के बराबर है, कमाल इसमें नहीं है कि लोग जिधर चल रहे हो, या हवा का रुख जिधर हो , उधर ही हम चलें , अरे मोमिन तो हवा का रुख भी पलट देता है , मोमिन के अंदर एक इंक़लाबी हैसियत होती है उसको ज़माना से क्या लेना देना अल्लामा इक़बाल ने क्या खूब कहा है कि
निगाह मर्द मोमिन से बदल जाती हैं तक़दीरें !