सीरत-ए-तैयबा के मुतालेआ की दावत

”सच्ची मोहब्बत“ इंसान को दीवाना बना देती है…
महबूब का दीवाना…  
महबूब की हर बात महबूब, 
हर अदा महबूब, 
महबूब की सूरत व सीरत महबूब…
महबूब ने जो फरमा दिया बस वही हर्फ़-ए-आखिर है…
महबूब ने जो समझा दिया वही दिल का नज़रिया बन गया… ऐ मुसलमानो! सलात-उल-हाजत पढ़ कर दुआ मांगो कि हमारे बे-हिस और खुद-गर्ज दिलों की इस्लाह हो और हमें हज़रत आका मदनी ﷺ की सच्ची मोहब्बत नसीब हो…
हज़रत आका मदनी ﷺ की सीरत को मोहब्बत से पढ़ो… 
आप ﷺ की सूरत व शबाहत को अपनाओ…
आप ﷺ की एक एक सुन्नत को जिंदा करो… और
आप ﷺ से इश्क वाला ताल्लुक बनाओ…
तब इस ”सच्ची मोहब्बत“ की बरकत से सच्चा ईमान नसीब होगा… इंशा अल्लाह…

हुजूर अकदस ﷺ की सीरत-ए-तैयबा का मुतालेआ करो…जरूर, लाज़िमन यह मुतालेआ हर मुसलमान करे…
उर्दू में बेहतरीन किताब ”सीरत-उल-मुस्तफा ﷺ “ है मौलाना मोहम्मद इदरीस कांधलवी रह. की…है


मक्तूब खादिम से इक्तिबास