दुआ की स्वीकृति के लिए हमेशा हलाल तरीके से कमाई हुई आमदनी अपने इस्तेमाल में लाएँ।
(मिन्हाज-उल-मुस्लिमीन, मुस्लिम किताब-उज़-ज़कात)
अल्लाह ताला को अपने करीब समझें और उससे सीधे माँगें।
(अल-बक़रा, कुरान)
दुआ करते वक़्त यह यकीन रखें कि दुआ ज़रूर क़बूल होगी।
(अल-मोमिन, कुरान)
दुआ को गिड़गिड़ा कर, झुक झुक कर करें।
(अल-अराफ़, कुरान)
दुआ हुज़ूर-ए-क़ल्ब से करें, अगर हुज़ूर-ए-क़ल्ब न हो तो दुआ क़बूल न होगी।
(तिरमिज़ी, हाकिम)
खुशहाली के दिनों में कसरत से दुआ करें ताकि मुसीबत के दिनों में दुआ जल्द क़बूल हो।
(तिरमिज़ी)
अल्लाह ताला से दुआ ज़रूर करते रहें, अगर दुआ न करें तो अल्लाह ताला नाराज़ होता है।
(तिरमिज़ी)
मौत की दुआ न करें।
(बुखारी)
दुआ इबादत है, लिहाज़ा दुआ सिवाए अल्लाह ताला के किसी से न माँगें।
(अहमद, तिरमिज़ी)