पानी का रंग न स्वाद फिर भी खुदा की कुदरत है। पानी के विभिन्न रूप हैं
,ऊपर को उठे तो भाप
,हवा में उड़े तो बादल
,ऊपर से गिरे तो बारिश
,जम कर गिरे तो ओला
,गिर कर जमे तो बर्फ
,रात में गिरे तो ओस
,फूल पर गिरे तो शबनम
,फूल से निकले तो अर्क
,आँख से निकले तो आँसू
,ज़मीन से निकले तो चश्मा
,जमा हो तो तालाब
,बहे तो दरिया
,कदम इस्माइल से निकले तो ज़मज़म
और हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उंगलियों मुबारक से निकले तो आब-ए-कौसर
क्या ही कुदरत का करिश्मा है
वाह सुब्हान अल्लाह व बिहमदिही सुब्हान अल्लाह अल-अज़ीम
उरवा जी