क्या नहुसत का कोई खास दिन या खास वक्त होता है?
हां! बे बरकती और नहुसत जो पैदा होती है, वह हमारे आमाल की वजह से होती है
जिस दिन हमें अल्लाह ताला की तरफ रुजू करने की तौफीक हो गई जिस दिन अल्लाह ताला की बारगाह में हाज़िरी की तौफीक हो गई वह दिन हमारे लिए मुबारक दिन है और खुदा न करे जिस दिन हम किसी मासियत में मुब्तिला हो गए किसी नाफरमानी का इर्तिकाब हम ने कर लिया वह दिन हमारे लिए मनहूस है
वह दिन अपनी ज़ात में मनहूस नहीं था ,लेकिन हम ने अपने अमल से उस के अंदर नहुसत पैदा कर ली लिहाजा अल्लाह ताला के तखलीक किए हुए अय्याम में कोई दिन म**** नहीं था मनहूस तो अल्लाह ताला की नाफरमानी है गुनाह है मासियत है मुनकिरात है यह सुबह नहुसत की चीजें हैं जिस दिन अल्लाह तबारक व ताला हमें इबादत की तौफीक दे दें और हम अल्लाह ताला की तरफ रुजू कर लें वह बरकत का दिन है
आलिमा फ़िज़ा सबाहत 🌷