मकसद नंबर:- १ निकाह इबादत है:
निकाह بذاتِ खुद اطاعت और इबादत है, और नफ़ल इबादत से अफ़ज़ल है।
मकसद नंबर:२ तक़वा का हुसूल:
निकाह का एक बड़ा मकसद परहेज़गारी और तक़वा है।
मकसद नंबर:३… جنسی तस्कीन का ज़रिया:
फ़ितरी तौर पर मर्द व औरत के अंदर جنسی ख़्वाहिशात रखी गई हैं, लज़्ज़त एक ऐसी चीज़ है जिस का तलबगार न सिर्फ़ इंसान है, बल्कि हर حیوان इस का तालिब है। वो بذاتِ खुद क़ाबिल مذمت चीज़ नहीं है, क़ाबिल مذمت वो इस वक़्त क़रार पाती है जब इस का ग़लत इस्तेमाल किया जाए और उमूर ख़ैर को तर्क करके नारवा मक़ामात को इस के इस्तेमाल के लिए मुंतख़ब किया जाए। इस फ़ितरी जज़्बे को पूरा करने का हलाल रास्ता यही निकाह है। निकाह छोड़ने से कई फ़ितनों में مبتلا हो जाने का ख़तरा रहता है। कुदरती तौर पर इंसान के अंदर जो شہوت का मादा है, ये इंसानी फ़ितरत का तक़ाज़ा है। अगर निकाह न हो तो नाजाइज़ तरीक़े से ये तक़ाज़ा पूरा करने की तरफ़ میلान होगा। अल्लाह تعالیٰ ने हराम से बचने के लिए ये हलाल रास्ता रखा है।
मकसद नंबर:४…औलाद का हुसूल :
औलाद का तलब करना भी निकाह के मक़ासिद में से है, इंसान की नस्ल का बाक़ी रहना भी इसी से मुमकिन है। इस मकसद के हुसूल पर हदीस में बड़ी ताकीद आई है कि :- تزوَّجو الولودَ الودودَ فإنِّي مُكاثرٌ بِكُمُ الأممَ يومَ القيامةِ.
*ऐसी औरतों से निकाह करो जो ज़्यादा मोहब्बत करने वाली और ज़्यादा बच्चे जनने वाली हों।*
मकसद नंबर:५…उम्मत मुहम्मदियाؐ के अफ़राद में इज़ाफ़ा:
उम्मत मुहम्मदिया के अफ़राद का ज़्यादा होना भी एक अहम मकसद है, जिस की हुज़ूर صلی اللہ علیہ وسلم ने तमन्ना फ़रमाई, आप صلی اللّٰہ علیہ وسلم ने इरशाद फ़रमाया कि: मैं तुम्हारी कसरत पर क़यामत के दिन फ़ख़र करूँगा।
इसी तरह क़ौमी ताक़त और तवानाई का दारोमदार आबादी की कसरत और उन की माद्दी और अंदरूनी क़ुव्वत पर मुनहसिर है