आज एक तहरीर नज़र से गुजरी जो निहायत मुख़्तसर, मुफीद, जामे बल्कि सबक आमोज़ महसूस हुई:
तन्क़ीद से पहले तहक़ीक़,
इल्ज़ाम से पहले सुबूत,
और इख़्तिलाफ़ से पहले दलील—
यह आला किरदार की नुमायां अलामत है।