नौजवानों के मुद्दे और उनका हल
आज का नौजवान सबसे ज़्यादा आज़माइश में है। एक तरफ़ ख्वाहिशात का तूफ़ान, दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया की चकाचौंध, और तीसरी तरफ़ दीन को “पुराना” कहने वाली सोच। ऐसे माहौल में अगर कोई नौजवान अपने ईमान को थामे रखे तो वो वाकई क़ाबिल-ए-मुबारकबाद है।
याद रखो! ईमान कमज़ोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताक़त है। जो नौजवान अल्लाह से जुड़ जाता है, वो वक्ती लज़्ज़तों के बदले दायमी कामयाबी का इंतखाब करता है। नमाज़ की पाबंदी, क़ुरान से ताल्लुक़ और सच्ची दुआ दिल को वो सुकून देती है जो दुनिया की कोई चीज़ नहीं दे सकती।
नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया:
“सात लोगों को अल्लाह अपने साए में जगह देगा, उन में एक वो नौजवान है जो अल्लाह की इबादत में पला बढ़ा”
(बुखारी, मुस्लिम)
सोशल मीडिया आज के नौजवान का सबसे बड़ा इम्तिहान है। हर चीज़ देखने के क़ाबिल नहीं होती, और हर आवाज़ सुनने के लायक नहीं होती। आँख, कान और दिल की हिफ़ाज़त ईमान की हिफ़ाज़त है। जो चीज़ अल्लाह से दूर करे, वो तरक़्क़ी नहीं बल्कि नुक़सान है।
अच्छी सोहबत नौजवान को बुलंद करती है और बुरी सोहबत गिरा देती है। अगर दोस्त तुम्हें गुनाह की तरफ़ ले जाएं तो समझ लो रास्ता ग़लत है। तन्हा नेकी बेहतर है बनिस्बत ऐसी महफ़िल के जो अल्लाह से ग़ाफ़िल कर दे।
आख़िर में नौजवानों से यही पैग़ाम है:
ये उम्र बार बार नहीं आती। अगर इस उम्र में ईमान बच गया तो ज़िन्दगी संवर जाएगी, और अगर यही उम्र ग़फ़लत में गुज़र गई तो पछतावा बाक़ी रह जाएगा।
अल्लाह ताला हमारे नौजवानों के ईमान की हिफ़ाज़त फरमाए और उन्हें हक़ पर साबित क़दम रखे। आमीन 🤲