अलहमदुलिल्लाह— यह दो लफ़्ज़ नहीं, बल्कि दिल की गहराईयों की आवाज़ है, रूह की रौशनी है और अल्लाह की अता करदा हर नेमत का शुक्र है।

ज़िन्दगी कभी खुशियों से सजती है और कभी आज़माइशों से भरी होती है। हर सांस, हर लम्हा, हर मुस्कराहट और हर आंसू अल्लाह की अता है। जो शख्स हर हाल में अलहमदुलिल्लाह कहता है, वह न सिर्फ नेमतों का शुक्र अदा करता है बल्कि मुश्किलों में सब्र, ग़म में सुकून और दिल में उम्मीद पा लेता है।
अल्लाह ताला ने हमें ज़िन्दगी, ईमान, सेहत, इल्म, वालिदैन की मोहब्बत, रिज़्क़ और अमन जैसी बेशुमार नेमतें अता की हैं। मगर इंसान अक्सर उन की क़द्र भूल जाता है। एक लम्हे की कमी, एक सांस का रुक जाना, हमें यह सिखाता है कि सब कुछ अल्लाह की मेहरबानी और फ़ज़ल है। इसी शऊर से दिल में शुक्र पैदा होता है, और ज़बान से निकलता है: अलहमदुलिल्लाह
यह लफ़्ज़ हमें आजिज़ी सिखाता है, दिल को सुकून देता है और रूह को ख़ुशी बख्शता है। ख़ुशी में शुक्र, ग़म में सब्र, हर हाल में अल्लाह की रज़ा को क़ुबूल करना ही असल शुक्र है। जो शख्स हर लम्हा अलहमदुलिल्लाह कहता है, अल्लाह उस के दिल को रौशनी देता है और ज़िन्दगी को बरकतों से भर देता है।
अलहमदुलिल्लाह !! यह लफ़्ज़ नहीं, एक ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा है, दिल की रौशनी है और रूह की राहत। जो शख्स हर हाल में शुक्र अदा करता है, वह दुनिया व आख़िरत में
कामयाबी और सुकून हासिल करता है  

🪶अज़: ह आइशा✰